चारधाम कपाट बंद होने की तिथि 2026 घोषित हो गई है। गंगोत्री धाम के कपाट 10 नवंबर को, केदारनाथ और यमुनोत्री के कपाट 11 नवंबर को और बद्रीनाथ के कपाट 16 नवंबर को रात 9:37 बजे शीतकाल के लिए बंद होंगे। यह घोषणा विजयदशमी, 20 अक्टूबर 2026 को बदरी-केदार मंदिर समिति ने की। अगर आप इस साल चारधाम यात्रा की अंतिम तिथियों में दर्शन करना चाहते हैं, तो कपाट बंद होने का समय, शीतकालीन गद्दीस्थल और यात्रा सुझाव यहां पढ़ें।
मंदिर बंद होने से पहले यात्रा करनी है?
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| धाम | कपाट बंद तिथि | समय | शीतकालीन गद्दीस्थल |
|---|---|---|---|
| श्री गंगोत्री जी | 10 नवंबर | दोपहर 12:05 बजे | मुखबा (मुखवा) |
| श्री यमुनोत्री जी | 11 नवंबर | सुबह 10:28 | खरसाली |
| श्री केदारनाथ जी | 11 नवंबर | सुबह 8:30 | ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ |
| श्री बद्रीनाथ जी | 16 नवंबर | रात 9:37 | पांडुकेश्वर व जोशीमठ |
चारधाम यात्रा कपाट बंद होने की तिथियां 2026
- श्री गंगोत्री जी: 10 नवंबर, अन्नकूट (गोवर्धन पूजा) पर, दोपहर 12:05 बजे
- श्री यमुनोत्री जी: 11 नवंबर, भैया दूज पर, सुबह 10:28
- श्री केदारनाथ जी: 11 नवंबर, भैया दूज पर, सुबह 8:30 बजे
- श्री बद्रीनाथ जी: 16 नवंबर, रात 9:37 बजे
कुछ यात्रा वेबसाइटों पर पहले बद्रीनाथ की संभावित तिथि 13 नवंबर बताई गई थी। विजयदशमी पर घोषित आधिकारिक तिथि 16 नवंबर है।
बद्रीनाथ: पंच पूजा कार्यक्रम (12 से 16 नवंबर)
बद्रीनाथ के कपाट बंद होने से पहले पांच दिन की पारंपरिक पंच पूजा होती है:
- 12 नवंबर: भगवान गणेश की विशेष पूजा, शाम को गणेश मंदिर के कपाट बंद।
- 13 नवंबर: आदि केदारेश्वर मंदिर और आदि गुरु शंकराचार्य मंदिर के कपाट बंद।
- 14 नवंबर: गर्भगृह में वेद ऋचाओं का वाचन और खड्ग पुस्तक पूजन संपन्न।
- 15 नवंबर: माता लक्ष्मी को कढ़ाई भोग अर्पित किया जाएगा और रावल उन्हें भगवान नारायण के साथ गर्भगृह में विराजमान होने का निमंत्रण देंगे।
- 16 नवंबर: माता लक्ष्मी गर्भगृह में विराजमान होंगी और रात 9:37 बजे कपाट बंद होंगे।
- 17 नवंबर: उद्धव जी और कुबेर जी की डोली आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी के साथ पांडुकेश्वर के लिए रवाना होगी और गरुड़ जी ज्योतिर्मठ के नृसिंह मंदिर जाएंगे।
पंचकेदार के अन्य धामों की तिथियां
- तुंगनाथ: 6 नवंबर (डोली 8 नवंबर को मक्कूमठ पहुंचेगी)
- मदमहेश्वर: 16 नवंबर (डोली 19 नवंबर को ऊखीमठ पहुंचेगी)
हर साल सर्दियों में कपाट क्यों बंद होते हैं?
ये धाम बहुत ऊंचाई पर स्थित हैं, लगभग 3,000 से 3,600 मीटर के बीच। नवंबर से भारी बर्फबारी, कड़ाके की ठंड और भूस्खलन का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए करीब छह महीने तक मंदिर बंद रहते हैं। अप्रैल या मई में, आमतौर पर अक्षय तृतीया के आसपास, कपाट फिर से खुलते हैं।
क्या कपाट बंद होने के बाद पूजा रुक जाती है?
नहीं। कपाट बंद होने पर देवताओं की डोली कम ऊंचाई वाले शीतकालीन स्थानों पर ले जाई जाती है, जहां पूरे सर्दियों में पूजा-अर्चना जारी रहती है:
- यमुनोत्री: मां यमुना की डोली खरसाली गांव जाती है।
- गंगोत्री: मां गंगा की डोली मुखबा (मुखवा) गांव जाती है।
- केदारनाथ: बाबा केदार की उत्सव डोली फाटा और गुप्तकाशी होते हुए ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ पहुंचती है।
- बद्रीनाथ: शीतकालीन पूजा पांडुकेश्वर और जोशीमठ के नृसिंह मंदिर में होती है।
कई श्रद्धालु इन शीतकालीन स्थानों पर दर्शन के लिए जाते हैं। यहां भीड़ कम और माहौल शांत रहता है, इसलिए जो लोग मुख्य यात्रा सीजन में नहीं आ पाए, उनके लिए यह अच्छा विकल्प है।
कपाट बंद होने से पहले यात्रा करने जा रहे हैं? ये बातें जरूर ध्यान रखें
कपाट बंद होने से पहले के दिन बहुत सुंदर होते हैं, जब साफ हवा और बर्फ से ढकी चोटियां दिखती हैं। लेकिन इसी समय सबसे ज्यादा ठंड और मौसम की अनिश्चितता भी रहती है।
- पहले से बुकिंग करें। कपाट बंद होने की तिथि के पास होटल, टैक्सी और हेलीकॉप्टर की बुकिंग जल्दी भर जाती है।
- रजिस्ट्रेशन जरूर करें। चारधाम यात्रा के लिए पंजीकरण अनिवार्य है। उसकी प्रिंट या डिजिटल कॉपी साथ रखें।
- ठंड के हिसाब से पैकिंग करें। थर्मल, भारी जैकेट, ऊनी टोपी, दस्ताने, गर्म मोजे, रेनकोट और आरामदायक जूते साथ रखें।
- यात्रा कार्यक्रम में लचीलापन रखें। जल्दी बर्फबारी या बारिश से सड़क और हेलीकॉप्टर सेवा प्रभावित हो सकती है, इसलिए एक अतिरिक्त दिन रखें।
- सुबह जल्दी निकलें। पहाड़ों में सुबह मौसम आमतौर पर साफ रहता है और दर्शन की लाइन भी छोटी मिलती है।
- सेहत का ध्यान रखें। खूब पानी पिएं, धीरे-धीरे चलें और अपनी नियमित दवाइयां साथ रखें, खासकर बुजुर्गों और बच्चों के साथ यात्रा में।
- निकलने से पहले तिथियां और समय दोबारा जांच लें। मौसम या मंदिर समिति के निर्णय से बदलाव हो सकता है।
सुझाया गया यात्रा क्रम
पारंपरिक क्रम है यमुनोत्री → गंगोत्री → केदारनाथ → बद्रीनाथ। गंगोत्री के कपाट 10 नवंबर को और यमुनोत्री व केदारनाथ के 11 नवंबर को बंद होंगे, जबकि बद्रीनाथ 16 नवंबर तक खुला रहेगा। इसलिए पहले तीन धामों में समय पर पहुंचने की योजना बनाएं। अगर समय कम है, तो हमारी टीम आपकी पसंद के धामों के हिसाब से रूट बना सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- 2026 में केदारनाथ के कपाट कब बंद होंगे?
11 नवंबर 2026 (भैया दूज) को सुबह 8:30 बजे।2026 में बद्रीनाथ के कपाट कब बंद होंगे?
16 नवंबर 2026 को रात 9:37 बजे। चारों धामों में सबसे अंत में बद्रीनाथ के कपाट बंद होंगे।गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट कब बंद होंगे?
गंगोत्री के 10 नवंबर और यमुनोत्री के 11 नवंबर 2026 को।कपाट बंद होने के बाद भी दर्शन हो सकते हैं?
मुख्य मंदिरों में प्रवेश नहीं होगा, लेकिन खरसाली, मुखबा, ऊखीमठ और पांडुकेश्वर/जोशीमठ में शीतकालीन दर्शन किए जा सकते हैं।मंदिर दोबारा कब खुलेंगे?
अप्रैल या मई में, हिंदू पंचांग के अनुसार, आमतौर पर अक्षय तृतीया के आसपास।
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